Thursday, November 6, 2008

ये हवाओं का रूख ही कुछ फिदा थाया मेरा नसीबकि दामन खुशियों का मोहताज न रहाइस कदर मेहरबान था खुदाऔर नसीबकि फैसले मेरे हक़ में थेऔर सबकी दुआयें भीदुख था कि बस कुछ अपने छूट गएलेकिन उससे कहीं अधिक खुशी थीकि कोई पराया अपना बन गयामद्धम चरागों ने भीरोशनी से सराबोर कर दियाचल पड़ा हूंएक नए जोश के साथकि बस आपका साथ चाहिए
PRAVAL BHASKAR.....

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